उन्नाव गैंगरेप: इलाहाबाद HC की बेहद तीखी टिप्पणी, कहा-ध्वस्त हाे चुकी है यूपी की कानून व्यवस्था

उन्नाव गैंगरेप: इलाहाबाद HC की बेहद तीखी टिप्पणी, कहा-ध्वस्त हाे चुकी है यूपी की कानून व्यवस्था

उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म में इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर​ लिया है। शुक्रवार दोपहर दो बजे हाईकोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।

इलाहाबादः उन्नाव गैंगरेप मामले की वीरवार काे इलाहाबाद हाईकाेर्ट में सुनवाई हुई। उन्नाव में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर आज बहस पूरी हो गई है। गैंगरेप आराेपी विधायक की अभी तक नहीं हुई गिरफ्तारी पर हाईकाेर्ट ने यूपी सरकार काे जमकर फटकार लगाई।

मामले की सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस डी बी भोसले और जस्टिस सुनीत कुमार ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था ध्वस्त हाे चुकी है। पीड़ित 6 महीने से इंसाफ की गुहार लगाती रही बावजूद इसके उसे न्याय नहीं मिला।

इस दाैरान चीफ जस्टिस ने यूपी सरकार से सवाल किया कि गैंगरेप आराेपी सेंगर काे गिरफ्तार कराेगे या नहीं। हाईकाेर्ट ने सरकार काे जवाब देने के लिए 2 घंटे का समय भी दिया था लेकिन उन्हाेंने गिरफ्तारी काे लेकर विधायक का बचाव करते हुए कहा कि आराेपी के खिलाफ काेई सबूत नहीं है। एेसे में हम गिरफ्तारी नहीं कर सकते हैं।

उन्नाव में सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस पूरी हो गई है। बहस के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। हाईकोर्ट कल दोपहर दो बजे के बाद अपना फैसला सुनाएगा। आज बहस के दौरान चीफ जस्टिस डीबी भोंसले ने मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यूपी की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। सामूहिक दुष्कर्म पीडि़ता छह महीने तक इंसाफ की गुहार लगाती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसके पिता की मौत के बाद उन्नाव पुलिस की नींद टूटी।

महाधिवक्ता से चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप सरकार की तरफ से हैं या आरोपी की तरफ से है। इससे पहले लंच के बाद सुनवाई में राज्य सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म के में विधायक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसमें पर्याप्त साक्ष्य होने पर कार्रवाई होगी। महाधिवक्ता ने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने की बात कही।

सरकार के इस जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सवाल किया क्या पुलिस हर मामले में इसी तरह पहले साक्ष्य जुटाती है। इसके बाद न्यायमित्र जीएस चतुर्वेदी कोर्ट ने भी अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया।

इससे पहले सुबह इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि मामले में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं हुई। हाईकोर्ट ने सरकार के महाधिवक्ता को दो बजे तक की मोहलत दी और कहा कि बताएं विधायक को गिरफ्तार करेंगे या नहीं।

उन्नाव के प्रकरण का कल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। इस पर आज सुबह दस बजे से होने वाली बहस दिन में 12 बजे हो सकी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लंच के बाद अब दोबारा दो बजे सुनवाई शुरू हो गई। मामले में सुबह राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की संस्तुति की है।

दरअसल जब सुनवाई शुरू हुई तो राज्य सरकार के महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने बताया कि 20 जून 20 17 को पीडि़ता की मां एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया कि बहला-फुसला कर तीन लोग उनकी बेटी को भगा ले गए है। मामले में पुलिस ने तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें बृजेश यादव, अवधेश तिवारी और शिवम गिरफ्तार भी किए गए, बाद में तीनों जमानत पर रिहा हुए हैं।

उन्होंने बताया कि 17 अगस्त 2017 को लड़की ने पहली बार विधायक के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत की। युवती ने आरोप लगाया कि उसके साथ 4 जून 2017 के उसके साथ रेप हुआ।

इस मामले में मामले में एक नई एफआईआर 12 अप्रैल 2018 को एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज की गई है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति कर दी है। एफआईआर में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को भी आरोपी बनाया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से पूछा कि अभी तक विधायक को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। महाधिवक्ता ने कहा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। कोई इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। उसने कहा कि मामला जन प्रतिनिधि से जुड़ा हुआ है, आप लंच के बाद 2 बजे तक कोर्ट को बताइए कि विधायक की गिरफ्तारी होगी या नहीं।

इसके पहले महाधिवक्ता ने कहा था कि विधायक पर पाक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दो बजे के बाद दोबारा सुनवाई शुरू हुई तो राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुये कहा कि विधायक के खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त साक्ष्य नहीे है। पर्याप्त साक्ष्य होने पर कार्रवाई की जायेगी। इसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले ने महाधिवक्ता से कहा कि आप सरकार का पक्ष रख रहे हैं कि अपराधी विधायक की ओर से बोल रहे हैं।

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर व इनके गुर्गों पर लड़की से दुष्कर्म का आरोप है। पीडि़ता के पिता ने प्राथमिकी दर्ज कराई जिसमें विधायक कुलदीप सिंह नामजद हैं। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया, जबकि उल्टे कार्रवाई करते हुए पीडि़ता के पिता को ही गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि पीडि़ता के पिता को विधायक के भाई अतुल सिंह आदि ने मारपीटा भी था। गंभीर चोटों के कारण पिता की मौत हो गयी। पोस्टमार्टम में उसके शरीर के भीतरी और बाहरी हिस्से में 14 चोट मिलीं। दबाव पडऩे पर पुलिस ने विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

कोर्ट ने कहा कि यह समझ से परे है कि अभियुक्तों को गिरफ्तार न कर पुलिस ने पीडि़ता के पिता को क्यों गिरफ्तार किया। कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय को जानकारी महाधिवक्ता और अपर महाधिवक्ता को देने को कहा है। कल वरिष्ठ अधिवक्ता के पत्र पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि शव जलाया न गया हो तो अंतिम संस्कार को रोका जाए लेकिन, शव का अंतिम संस्कार 10 अप्रैल को ही हो चुका है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उन्नाव में लड़की से दुष्कर्म और उसके पिता की मौत को स्वत: संज्ञान लेने व मानीटर करने की मांग की।

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