पर्यावरण संरक्षण पर शिक्षाप्रद बाल फिल्म: हमारी पलटन 

पर्यावरण संरक्षण पर शिक्षाप्रद बाल फिल्म: हमारी पलटन 

लेखक व निर्देशक जैनेंद्र जिज्ञासु ने बाल फिल्म हमारी पलटन में बहुत ही अच्छे मुद्दे उठाए हैं मगर कमजोर पटकथा व धीमी गति के चलते फिल्म अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाती। बाल फिल्म के हिसाब से मास्टर जी का बच्चों को सीख देने का अच्छा तरीका अपनाया गया है। सारे बच्चे भावना के साथ मिलकर अदालत में पी आई एल दाखिल करने के साथ ही जंगल के पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की तर्ज पर आंदोलन करते हैं।

नई दिल्ली (काजल शर्मा नसीम कुरैशी)। पर्यावरण संरक्षण, बिजली, पानी बचाओ और शिक्षा आदि की बात करने वाली बाल फिल्म हमारी पलटन पटकथा व निर्देशन के चलते उतनी बेहतरीन फिल्म नहीं बन पाई जितनी बन सकती थी। फिल्म हमारी पलटन की शुरुआत होती है बड़ी संख्या में हरे भरे पेड़ों के काटे जाने व पृथ्वी पर पानी के अभाव में सूखा पड़ने के दृश्यों के साथ। फिर कुछ वर्ष पहले बारिश के मौसम में उत्तराखंड में हुई तबाही के टी वी समाचार के साथ फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है। एक शिक्षिका नंदिता गांव के बच्चों को इकट्ठा कर उन्हें पढ़ाती हैं। वह समाज सेविका हैं। जबकि मास्टरजी (टाम आल्टर) के नाम से मशहूर उनके पति भी नंदिता के बच्चों के लिए स्कूल की किताबें व नोटबुक आदि उपलब्ध कराते रहते हैं। एक दिन कुछ असामाजिक तत्व नंदिता की हत्या कर देते हैं। उसके बाद से मास्टर जी अपनी दत्तक बेटी भावना (प्रगति मंगला) के साथ समाज सेवा के कार्य को आगे बढ़ाते हैं। वे हर दिन साइकिल पर घूमते हुए बड़ी बड़ी इमारतों में रहने वाले अमीरों के बच्चों को पानी व बिजली बचाने की सीख देते रहते हैं। मास्टर जी अपनी पत्नी के जन्मदिन पर हर साल अलग अलग कालोनियों में पेड़ पौधे बच्चों के हाथों से लगवाते हुए उन्हें समझाते हैं कि पेड़ों के होने से कितने फायदे हैं। पेड़ों की वजह से हम इंसान जिंदा हैं। पड़ोसी सोनपुर गांव के किसान हीरा के बेटे चैतन्य (मास्टर हेमंत) को अच्छा क्रिकेट खेलने व पढ़ाई में अच्छा होने पर वे शहर के एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में प्रवेश दिला देते हैं। पहले दिन कक्षा में चैतन्य का सभी मजाक उड़ाते हैं पर दो दिन बाद जब मास्टर जी की कालोनी के अमीर माता पिता के बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे उसी वक्त मास्टर जी के घर पर दूध पहुंचाकर वापस लौट रहे चैतन्य को गेंद लगती है। चैतन्य वह गेंद उठाकर बल्लेबाजी कर रहे कबीर को फेंकता है और कबीर आउट हो जाता है। अब सभी बच्चे आपस में बाते करते हैं कि वह अब तक हर मैच हारते आए हैं क्योंकि उनकी टीम पलटन में कोई अच्छा गेंदबाज नही है। कबीर दूसरे दिन स्कूल में चैतन्य से दोस्ती कर लेता है। फिर तय होता है कि कबीर व उसके बाकी दोस्त चैतन्य को अंग्रेजी पढ़ाएंगे तथा वो उनके साथ क्रिकेट खेलेगा। कुछ समय बाद मंत्री (मनोज बख्शी) की मदद से एक ठेकेदार रास बिहारी (रजनीश) पूरे सोनपुर गांव व उसके आसपास के जंगल के पेड़ों को कटवाकर नदी पर बांध बनवाकर फैक्टरी खड़ा करना चाहता है। इसके चलते दूसरे किसानों के साथ ही चैतन्य के परिवार को भी सोनपुर गांव छोड़ने का आदेश सुना दिया जाता है। अब चैतन्य का स्कूल जाना बंद हो जाता है। मास्टरजी कहते हैं कि वह ऐसा नहीं होने देंगे। जंगल कटने नहीं देंगे। मास्टर जी कबीर व उसके दूसरे साथियों को लेकर चैतन्य के गांव में उसका घर दिखाकर सारी बात बताते हैं। इस पर स्कूल के प्रिंसिपल सभी छात्रों के माता पिता को बुलाकर बैठक कर बताते हैं कि मास्टर जी उनके बेटों को भड़का रहे हैं। इधर मास्टरजी पी आई एल दाखिल करने की तैयारी करते हैं। ठेकेदार रास बिहारी उनकी हत्या कर देता है। इससे सारे बच्चे भावना के साथ मिलकर अदालत में पी आई एल दाखिल करने के साथ ही जंगल के पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन की तर्ज पर आंदोलन करते हैं। टी वी पर खबर आती है मुख्यमंत्री मंत्री को तलब करते हैं। उस दिन पेड़ का कटना रुक जाता है। मंत्रीजी टी वी पर घोषणा करते हैं कि वह सोनपुर गांव जाकर आंदोलनकारी बच्चों से सवाल जवाब करेंगे कि वह विकास में रोड़ा क्यों डाल रहे हैं। इधर मंत्रीजी व बच्चों के बीच सवाल जवाब हो रहे हैं तभी अदालत से पी आई एल स्वीकार होने, जंगल को काटने व सोनपुर गांव के निवासियों को वहां से हटाने पर रोक का आदेश आ जाता है। लेखक व निर्देशक जैनेंद्र जिज्ञासु ने बाल फिल्म हमारी पलटन में बहुत ही अच्छे मुद्दे उठाए हैं मगर कमजोर पटकथा व धीमी गति के चलते फिल्म अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाती। बाल फिल्म के हिसाब से मास्टर जी का बच्चों को सीख देने का अच्छा तरीका अपनाया गया है। संवाद भी ठीक हैं। फिल्म की पटकथा पर मेहनत की गयी होती तो फिल्म काफी बेहतर बन सकती थी। जहां तक अभिनय का सवाल है तो अभिनय में टाम आल्टर का कोई सानी नहीं रहा। उन्होंने मास्टरजी के किरदार को जीवंतता प्रदान की है। बाल कलाकार हेमंत के साथ दूसरे बच्चों ने भी ठीक ठाक अभिनय किया है। फिल्म का गीत संगीत भी कमजोर है। लगभग दो घंटे की अवधि वाली फिल्म हमारी पलटन का निर्माण अलख मीडिया ने किया है। फिल्म के लेखक व निर्देशक जैनेंद्र जिज्ञासु हैं। पटकथा, संवाद व गीत लेखक जैनेंद्र जिज्ञासु, एनीमेशन कर्ता मोहम्मद इरफान, संगीतकार मालती माथुर, वी हेमानंदन व अनुराग सिंह तथा कैमरामैन सतिंदर व विजय चव्हाण हैं। फिल्म में बाल कलाकारों के साथ टाम आल्टर और मनोज बख्शी की अहम भूमिकाएं हैं।

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