सोमवार को घर से निकलने से पहले ले लें हालात का जायज़ा, दलित समुदाय का भारत बंद बन सकता है परेशानी का शबब

सोमवार को घर से निकलने से पहले ले लें हालात का जायज़ा, दलित समुदाय का भारत बंद बन सकता है परेशानी का शबब

नई दिल्ली: एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में देशभर में दलित समुदाय ने सोमवार को भारत बंद का ऐलान किया है. एस.सी./एस.टी. एक्ट संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित समाज ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया है। कई संगठनों ने भारत बंद को सफल बनाने के लिए जगह-जगह लोगों से इसमें शामिल होने का आह्वान किया है। वहीं प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए चौकसी कड़ी कर दी गई है। इसी बीच पंजाब सरकार ने सोमवार को स्कूल-कॉलेज बंद करने का ऐलान कर दिया है। राज्य भर में 4000 के करीब जवानों को तैनात किया गया है।

भारत बंद का कई संगठनों ने किया समर्थन
सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ सोमवार को घोषित भारत बंद का कई संगठनों ने समर्थन किया है. इसके तहत कई पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरेंगे. संगठनों की मांग है कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए.

पंजाब में सेना तैनात, इंटरनेट सेवाएं रहेंगी बंद
सरकार ने कल दिनभर इंटरनेट सेवा बंद करने के भी आदेश दे दिए हैं। राज्यभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। पंजाब के प्रमुख सचिव करन ए सिंह ने केंद्र सरकार रक्षा सचिव को पत्र लिखकर सैन्य बलों की मांग की है ताकि कानून व्यवस्था को कायम रखा जा सके। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी प्रदर्शन के दौरान दलित संगठनों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। बंद का आह्वान करने वाले संगठनों के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है कि पंजाब सरकार दलितों के किसी भी अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा।

दलित समुदाय ने किया एससी के फैसले का विरोध
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से एस.सी./एस.टी. एक्ट के संबंध में सुनाए गए एक फैसले से दलित समुदाय में रोष है। इस समुदाय के लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने भी कोई रीव्यू पटीशन दाखिल नहीं की जिससे केंद्र सरकार का दलित विरोधी रवैया स्पष्ट होता है। इससे दलितों पर होने वाले अत्याचारों में वृद्धि होगी व उन्हें मिलने वाले इंसाफ की उम्मीद और मद्धम हो जाएगी। इसी रोष में देश भर में दलित संगठनों ने उक्त फैसले के खिलाफ 2 अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया है।

दलितों के खिलाफ बढ़ते आपराधिक आंकड़े
सुप्रीम कोर्ट में वकील संतोष कुमार का कहना है कि शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के उन आकड़ों पर विचार नहीं किया जो बताती हैं कि 2014 में दलितों के ख़िलाफ़ 47064 अपराध हुए. यानी औसतन हर घंटे दलितों के ख़िलाफ़ पांच से ज़्यादा (5.3) अपराध हुए हैं. अपराधों की गंभीरता को देखें तो इस दौरान हर दिन दो दलितों की हत्या हुई और हर दिन औसतन छह दलित महिलाएं (6.17) बलात्कार की शिकार हुई हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2004 से 2013 तक 6,490 दलितों की हत्याएं हुईं और 14,253 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार हुए हैं.

क्या है एससी-एसटी एक्ट
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम 1989 को 11 सितम्बर, 1989 को संसद में पारित किया गया था। 30 जनवरी, 1990 को इस कानून को जम्मू-कश्मीर छोड़ पूरे देश में लागू किया गया। एक्ट के मुताबिक कोई भी ऐसा व्यक्ति जो कि एससी-एसटी से संबंध नहीं रखता हो, अगर अनुसूचित जाति या जनजाति को किसी भी तरह से प्रताड़ित करता है तो उस पर कार्रवाई होगी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम, 1989 के तहत आरोप लगने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा।

पंजाब हरियाणा में हर स्थिति से निपटने की तैयारी
पंजाब के मुख्य सचिव करण ए. सिंह ने रक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि पंजाब सरकार कानून और व्यवस्था लागू करने के लिए आर्मी जो भी मदद मांगेगी, उसे मुहैया कराई जाएगी. पंजाब में अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी को देखते हुए सरकार हर स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है.

छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र में भारत बंद को कांग्रेस का समर्थन
उधर, छत्तीसगढ़ में भारत बंद को कांग्रेस और जोगी कांग्रेस ने पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है. दूसरी ओर हरियाणा में ऑल हरियाणा एससी इम्प्लाइज फेडरेशन और समस्त एससी समाज के प्रतिनिधियों ने कई कालोनियों और कार्यालयों का दौरा कर 2 अप्रैल को विशाल प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है.

राजस्थान समेत कई राज्यों में दिखेगा असर
राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी कस्बे के डॉ. अंबेडकर भवन में रविवार को एससी, एसटी संघर्ष समिति की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन पर विरोध जताते हुए एक्ट को पूर्व की भांति पुनः लागू कराने की मांग को लेकर सोमवार को भारत बंद का समर्थन किया. भारत बंद के समर्थन के साथ ही संघर्ष समिति ने कस्बे में शांति मार्च निकाल कर एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देने का निर्णय लिया.

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