Wed. Sep 26th, 2018

प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का प्रवर्तक बुंदेलखंड आज फिर महासमर की राह पर

प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम का प्रवर्तक बुंदेलखंड आज फिर महासमर की राह पर

“बड़े लड़इया महुबे वाले, इनकी मार सही न जाए!

भीख नहीं ये न्याय मांगते, वरना सच भी बौरा जाए!!”

बुलंद बुंदेलखंड सीरीज पार्ट- 2 (विशेष रिपोर्ट)

झाँसी का “ठगीकांड”

१३ जुलाई, २०१८ को झाँसी पुलिस व प्रशासन ने कुछ स्थानीय नेताओं के दवाव में आकर झाँसी स्थित “मानव कल्याण विकासवादी संस्थान” नामक समाजसेवी संस्थान पर बिना किसी पूर्व नोटिस के छापेमारी की और संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष चन्द्रशेखर वर्मा पर ठगी, जालसाज़ी और धोखाधड़ी जैसे मनगढ़ंत और झूठे आरोप लगाए। जबकि संस्थान के एक भी सदस्य ने संस्थान के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की। आज प्रशासन को दो महीने बाद भी नहीं पता कि संस्थान व उसके संचालक ने किसके साथ और कैसे धोखाधड़ी की।

कार्रवाई पहले, नोटिस बाद में

जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित ४-सदस्यीय जांच टीम ने संस्था के कार्यालय में औचक निरीक्षण के बाद बिना आरोप पत्र दायर किए बिना सिर्फ मीडिया के जरिए आरोप लगाए। अगर प्रशासन के पास संस्था द्वारा कुछ गलत कार्य करने की कोई जायज़ शिकायत थी तो संस्था को नोटिस देकर पूछा जाना चाहिए था। लेकिन यहां तो छापे की कार्रवाई पहले की गयी नोटिस बाद में जारी किया गया जो १० दिन बाद मिला।

जिसकी जितनी सैलरी उसका उतना डीडी

नोटिस में उल्लेखित किसी संदेहास्पद शिकायत में लिखा गया कि मानव कल्याण विकासवादी संस्थान जिसका कार्यालय झाँसी के इलाइट चौराहे के पास बालाजी टावर में हैं, जहाँ लोगों को सोशल जॉब दी जा रही है और जिसकी जितनी सैलरी है लगभग उतने का ही डीडी जमा कराया जा रहा है। जिसमें संदेह जताया गया कि कहीं यह किसी जालसाजी का मामला तो नहीं है? इसकी जांच कराई जाये।

डीएम साहब क्या एक हफ्ते में रिपोर्ट जमा हुई

झाँसी जिलाधिकारी ने अपने प्रपत्र में संस्था के सहायक रजिस्ट्रार से यह पूछा कि यह कार्य संस्थान के संविधान / नियमावली के किन उद्देश्यों / प्रावधानों के तहत संचालित है, इसकी जांच करके एक हफ्ते में इसकी रिपोर्ट जमा करें, जिसमें असफल रहने पर क्यों न आप (संस्थान) के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। कार्य और उसकी कार्यशैली उसके के खिलाफ हैं। लेकिन डीएम साहब क्या एक हफ्ते में रिपोर्ट जमा हुई, नहीं हुई तो क्या आपने किसी के खिलाफ एक्शन लिया? किसी अधिकारी को बर्खास्त किया?

संस्था पर लगाए गए आरोप मनगढ़ंत और झूठे

सहायक रजिस्ट्रार ने बिना किसी विस्तृत जांच में जाने के बजाय शिकायत में व्यक्त संदेहों और सवालों को अपनी रपट के नतीजों में तब्दील करने में अपना कीमती वक़्त जाया नहीं किया। उन्होंने लिखा, संस्थान का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कूटनीतिक अभिलेखों पर आधारित हैं, लेकिन उन्होंने यह साफ़ नहीं किया कि अगर संस्थान के अभिलेख कूटनीतिक थे तो उन्होंने उसका नवीनीकरण ही क्यों किया?    

पुलिस प्रशासन की कूटनीतिक चाल हुई फेल  

सूत्रों का कहना है कि संस्थान पर मारे गए छापे में पुलिस को संस्थान के खिलाफ कुछ खास नहीं मिला। छापा डालने के लगभग डेढ़ महीने बाद भी पुलिस व प्रशासन के हाथ खाली के खाली रहे। यही कारण था कि संस्था के सदस्यों को सिटी न्यूज़ के जरिए भड़काने व बरगलाने की भरपूर कोशिशें की गईं पर कोई नतीजा नहीं निकला। पुलिस की तमाम अपीलों और कूटनीतिक चालों के बावजूद संस्थान के खिलाफ न तो कोई सबूत हाथ लगा और न ही संस्थान का कोई सदस्य शिकायत करने आया। अब सवाल उठा कि अपना मुंह कैसे छिपाया जाए? कानून की नाक का सवाल जो है। 

पुलिस लोगों को पकड़ती और पीटती रही

यही कारण है कि मामले को ठोस आधार देने, केस को मजबूती प्रदान करने के लिए पुलिस बार-बार संस्था के कई कार्यालयों को रौंदती रही, फर्जी तरीके से संस्थान के लोगों को उठाती रही और उन्हें पीटती रही लेकिन उन्होंने न तो कोई सच उगला और न ही नोट क्योंकि उनके पास दोनों ही नहीं थे। स्थानीय अखबारों में संस्थान के खिलाफ संस्थान का नाम लिए बिना फर्जी ख़बरें छपवाई जाती रहीं। लेकिन निकला क्या, वही ढ़ाक के तीन पात?

फर्जी छापेमारी की हो सीबीआई जांच

लोकतंत्र के चौथे खम्बे “प्रेस” की आज़ादी को अक्षुण्ण रखने के लिए झाँसी के कमोबेश सभी अखबारों में संस्थान के खिलाफ हो रही फर्जी रिपोर्टिंग की उच्चस्तरीय जांच की जरूरत है। लेकिन यह एक अलग विषय है जिस पर अलग से हम सीरीज चलाएंगे और जिम्मेदार अखबारों की काली करतूतों को देश की सर्वोच्च अदालत में एक्सपोज़ करेंगे। संस्थान के संचालक और लगभग सभी सिविल कमांडोज भी चाहते हैं कि क्यों न इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच कराई जाए, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। 

बुलंद बुंदेलखंड सीरीज पार्ट- 2…..जारी

किसी ने सच ही लिखा है, “बड़े लड़इया महुबे वाले, इनकी मार सही न जाए! भीख नहीं ये न्याय मांगते, वरना सच भी बौरा जाए!!”

(दोस्तों, हम “बुलंद बुंदेलखंड” शीर्षक से एक कॉलम की शुरूआत कर रहे हैं जिसमें देश के गाँव, देहात और शहरों में रह रहे लोगों के जीवन से जुड़े मसले, मुद्दे, समस्याएं व मुश्किलात शामिल किये जाएंगे। इस पर आपके विचार, सुझाव, समस्याएं और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित हैं। आप अपनी समस्या यदि कोई हो तो हमें लिखकर भेजें हम उसे भी इसमें शामिल करेंगे। हाँ, हो सकता है, यहाँ व्यक्त किये गए विचारों, मुद्दों से आप सहमत न हों, ऐसे में लोकतंत्र और पत्रकारिता के आदर्श मूल्यों की रक्षा के लिए हम यहाँ हमारे विरोधी विचारों -आवाजों को भी स्थान देंगे। आप अपने अमूल्य सुझाव, विचार, प्रतिक्रिया व आपत्तियां हमें ईमेल (indiaajtak.com@gmail.com) से भेजें। हम यहां उन्हें सहर्ष प्रकाशित करेंगे। फिलहाल, इस श्रंखला की शुरुआत हम बुंदेलखंड क्षेत्र के चर्चित विषय “मानव कल्याण विकासवादी संस्थान” से कर रहे हैं।)

-आईपीएस यादव, लेखक, पत्रकार एवं पीआर कंसलटेंट । प्रॉपराइटर, इंडिपेंडेंट पब्लिसिटी सर्विसेज, मुंबई । एडिटर, इंडिया आजतक न्यूज़ वेब पोर्टल । इंडिया आजतक लाइव यूट्यूब चैनल । संपर्क: Email: indiaajtak.com@gmail.com

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