Wed. Sep 26th, 2018

रिसर्च स्कॉलर है ‘सवर्ण सेना’ का अध्यक्ष जिसके कहने पर बंद हो गया बिहार

रिसर्च स्कॉलर है ‘सवर्ण सेना’ का अध्यक्ष जिसके कहने पर बंद हो गया बिहार

भारत बंद को बिहार में असरदार बनाने के लिये इस सेना ने कोई प्रचार नहीं किया था, बल्कि प्रचार के लिये सोशल मीडिया को प्लेटफार्म चुना था.

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग को लेकर बुलाये गये भारत बंद का बिहार में भी व्यापक असर रहा. बिहार में इस बंद का आहवान सवर्ण सेना ने किया था. बंद का असर इस कदर रहा कि राज्य में सड़क से लेकर रेल मार्ग तक पर यातायात बाधित रहा. गरीब सवर्णों के आरक्षण की मांग और एससी-एसटी एक्ट में हुए सुधार के विरोध में बुलाये गये इस बंद के पीछे कौन चेहरा था, किसके कहने पर बिहार में सवर्ण तबके के लोग सड़कों पर उतर आये और इस संगठन का उद्देश्य आखिर क्या है, न्यूज 18 ने इन सारे सवालों का जवाब खोजा. इसके लिये हमने सवर्ण सेना के अध्यक्ष भागवत शर्मा से बात की.

रिसर्च स्कॉलर हैं भागवत

मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले भागवत शर्मा ने न्यूज 18 के उन सारे सवालों का जवाब दिया जिसे जानना हमारे और आपके लिये जरूरी था. भागवत शर्मा खुद हिन्दी से रिसर्च स्कॉलर हैं और अरुणाचल प्रदेश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी से कामायनी पर रिसर्च कर रहे हैं. वो पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक मसलों को लेकर भी सक्रिय रहते हैं. आरक्षण को लेकर उनका रुझान कॉलेज के दिनों में ही सामने आया था.

एससी-एसटी एक्ट और आरक्षण का नहीं विरोध

भागवत कहते हैं कि न तो मेरी लड़ाई आरक्षण के विरुद्ध है और न ही एससी-एसटी एक्ट से. मेरी मांग है कि बिहार समेत देश के उन सवर्णों को भी आरक्षण का लाभ मिले, जो आर्थिक तौर से कमजोर हैं. एससी-एसटी एक्ट कानून में सुधार हो, ताकि किसी निर्दोष को इस एक्ट में न फंसाया जा सके. भागवत ने कहा कि आज देश में इस एक्ट के तहत होने वाले मुकदमों में 80 फीसदी से ज्यादा फर्जी हैं जिसे मैं नहीं बल्कि कोर्ट कह रहा है.

50 हजार से ज्यादा हैं सदस्य

भागवत ने कहा कि मैं इस मुद्दे को 2016 से ही उठा रहा हूं और समय-समय पर सड़क पर भी उतरता हूं, लेकिन वैधानिक तरीके से. भागवत ने सवर्ण सेना को रजिस्टर्ड करा रखा है. उनके मुताबिक सवर्ण सेना 2017 में रजिस्टर्ड हुई और अभी इस सेना के 50 हजार से ज्यादा सदस्य हैं. ये पूछे जाने पर कि क्या कारण है कि दो साल बाद भी सवर्ण सेना परिचय की मोहताज है, इसके जवाब में भागवत ने कहा कि हमारी सेना को अब किसी परिचय की जरूरत नहीं है. हमने दो सालों में संगठन को मजबूत किया है.

सोशल मीडिया से होती है कैंपेनिंग

आपको जानकर ये हैरानी होगी कि भारत बंद को बिहार में असरदार बनाने के लिये इस सेना ने घूम-घूम कर कोई प्रचार नहीं किया था, बल्कि प्रचार के लिये सोशल मीडिया को प्लेटफार्म चुना था. भागवत ने बताया कि अब हम बिहार के साथ-साथ झारखंड और यूपी जैसे राज्यों में भी बड़ी तेजी से फैल रहे हैं और इस मुहिम में हमारी ताकत सोशल मीडिया है. इस सेना को लोग अपने मैसेज को व्हाटसऐप और फेसबुक ग्रुप में वायरल करते हैं, क्योंकि कम समय में सभी लोगों तक पहुंचने का यही मात्र साधन है.

2019 होगा निर्णायक

सवर्णों के आरक्षण की लड़ाई लड़ रही इस सेना का मानना है कि 2019 के चुनाव से पहले सरकार का इस मसले पर लिया गया फैसला निर्णायक होगा. हमने सरकार को फिर से चेतावनी दी है और जरूरत पड़ी तो फिर से सड़क से लेकर सदन तक जाने की कोशिश करेंगे.

सवर्णों को ठगती है बीजेपी

भागवत कहते हैं कि मेरा मानना है कि आज 90 फीसदी सवर्ण अपना वोट बीजेपी को देते हैं, क्योंकि वो बीजेपी को सवर्णों की पार्टी समझते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. बड़े-बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद बीजेपी सवर्णों को ठगने का काम करती है, बावजूद इसके सर्वण में से 90 फीसदी लोग बीजेपी को ही वोट करते हैं.

भागवत ने कहा कि मेरी और मेरी सेना की लड़ाई जारी रहेगी और हम केवल आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट संशोधन को ही नहीं बल्कि उन सभी मुद्दों को उठायेंगे जिनका देश और समाज से सरोकार है..

साभार: न्यूज 18

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *