Wed. Sep 26th, 2018

प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम प्रवर्तक बुंदेलखंड महासमर की राह पर

बुलंद बुंदेलखंड सीरीज पार्ट- 3
प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम प्रवर्तक बुंदेलखंड महासमर की राह पर
“बड़े लड़इया महुबे वाले, इनकी मार सही न जाए! भीख नहीं ये न्याय मांगते, वरना सच भी बौरा जाए!!”
3500 लोग बेकारी और भुखमरी के कगार पर
संस्थान के सदस्यों द्वारा झाँसी पुलिस व प्रशासन को न्याय की अनेक गुहारों के बावजूद आज समूचे बुंदेलखंड के बेरोजगार लोग और अपने जीविकोपार्जन और न्याय से वंचित करीब 3500 सदस्य भुखमरी के कगार पर हैं। संस्थान के सदस्यों द्वारा झाँसी पुलिस व प्रशासन को न्याय की अनेक गुहारों के बावजूद आज समूचे बुंदेलखंड के बेरोजगार लोग और अपने जीविकोपार्जन और न्याय से वंचित करीब 3500 सदस्य भुखमरी के कगार पर हैं। इन लोगों ने न जाने कितनी बार जिलाधिकारी, आयुक्त, पुलिस से संस्था के ऑफिस और बैंक कहते खोलने की गुहार लगाई, प्रदर्शन भी किया लेकिन लगता है गूंगे-बहरे कानों तक यह आवाज नहीं पहुँच सकी। हालांकि हमारे सूत्रों का कहना है पूरे स्थानीय प्रशासन पर मामले को लंबा लटकाये रखने का भारी दवाब है, इसलिए यहाँ कुछ होने वाला नहीं है।
जातिवाद का शूल
कुछ लोगों में इस पूरे मामले में धर्म, संप्रदाय, जाति को लेकर भी चर्चा है। क्या “मानव कल्याण विकासवादी संस्थान” के संचालक चंद्रशेखर वर्मा जिसका दोष सिर्फ यह है कि वह एक निचली (नीच नहीं) जाति में पैदा हुए इसलिए आज ऊंची जाति के कुछ लोग उन्हें नष्ट-ध्वस्त, बरदबाद कर देना चाहते हैं। लेकिन चंद्रशेखर के करीबियों का मानना है कि चंद्रशेखर वर्मा कोई खिलौना नहीं जिसको जिसने जब चाहा तोड़ दिया और जोड़ दिया बल्कि वह रबर की वह गेंद हैं जिसे जितना दबाओगे वह उतना ज्यादा उछलेगी। चंद्रशेखर का बुलंद हौसला ही उसकी असली पूँजी है जिस दिन वह टूटेगा चंद्रशेखर टूट जाएगा।
डिप्टी रजिस्ट्रार का तुगलकी फरमान
झाँसी मंडल के सोसाइटी एंड चिट्स के डिप्टी रजिस्ट्रार जो सोसाइटी पंजीकरण और नवीकरण के लिए अधिकृत अधिकारी हैं, उनको इस पूरे मामले में बलि का बकरा बनाया गया। वह अपनी तथाकथित जांच में कहते हैं कि फर्जी तरीके से संस्था के रजिस्ट्रेशन का नवीकरण कराया गया। जबकि संस्था का रजिस्ट्रेशन और उसका नवीकरण उन्होंने खुद किया था। यह महाशय बिना किसी सबूत या विधिवत जांच के न केवल संस्थान का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का फर्जी व तुगलकी फरमान सुनाते हैं बल्कि संस्थान का कार्यालय और बैंक खाता भी सील करवा देते हैं। कहा जा रहा है कि इस डिप्टी रजिस्ट्रार के आगे खाई, और पीछे पहाड़ है। या तो संस्था रिन्यू करके उन्होंने तब गलती की थी या बिना नोटिस छापा ड़ालकर और बिना किसी विधिवत जांच के संस्था बंद करके खुद उन्होंने ये फर्जीवाड़ा किया है।
हज़ारों का पलायन रोकने के लिए “संघर्षरत मसीहा”
बुंदेलखंड क्षेत्र में आज चंद्रशेखर वर्मा एक ऐसा “मसीहा” बनकर उभरा है जो एक आदमी अकेला बुंदेलखंड के हज़ारों बेरोजगारो का पलायन रोकने के लिए कृतसंकल्प है। लेकिन अफ़सोस यह है कि प्रशासन, सियासत और उसके अपने कुछ कथित भरोसेमंद लोग ही उसकी जड़ें काटने में लगे हुए हैं। सुना है संस्थान में लगभग 3500 सदस्य हैं, लेकिन मजाल है क्या किसी सदस्य ने प्रशासन को कभी शिकायत की हो, जहाँ पर इतनी बड़ी तादात में लोगों के रोजगार की बात हो, बिना किसी विधिवत शिकायत के संस्था के खिलाफ इतनी बड़ी कार्यवाई करना क्या कानूनी और संवैधानिक रूप से उचित है। यह शिकायत करने वाले और जांच करने वाले प्रशासन की नीयत पर भी सवाल खड़े करता है।
बिना अपराध साबित हुए अपराधी घोषित
प्रशासन को यदि ये लगता था कि ये संस्था फर्जी है तो क्यों नहीं एक भी बार संस्थान से उसकी आय या व्यय के बारे में पूछतांछ की? क्या सीधे-सीधे छापेमारी करना न्यायसंगत था। चलिए, मान भी लिया जाए कि यह संस्थान, इसके सदस्य जिन्हें स्वयंभू “सिविल कमांडो” के नाम से जाना जाता है और इसका मुखिया बहुत बड़े ठग, जालसाज और धोखेबाज़ है लेकिन क्या बिना किसी सबूत, जांच और कानूनी प्रक्रिया से गुजरते हुए किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले ही आप उन्हें दबोच लेंगे और अपराधी घोषित कर देंगे?
कीचड़ उछालने वालों की नीयत में है खोट
संस्थान से बाहर का कोई भी व्यक्ति “मानव कल्याण विकासवादी संस्थान” और उसके संचालक पर कितना भी कीचड़ उछाले, लेकिन संस्थान के सिविल कमांडो चंद्रशेखर वर्मा को हमेशा अपना बॉस और मसीहा ही मानते थे, हैं और आगे भी मानते रहेंगे।
संस्थान का उद्देश्य कुछ और
क्योकि वह ये भली भांति जानते हैं कि चंद्रशेखर वर्मा और संस्थान का उद्देश्य और लक्ष्य मात्र कुछ हज़ार लोगों को रोजगार देना नहीं बल्कि उनके सभी १२ प्रोजेक्ट को हकीकत के धरातल पर उतारना है और उसके बाद बुंदेलखंड ही नहीं बल्कि देशभर के लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
नीयत में कोई खोट नहीं
उनकी नीयत में कोई खोट नहीं बल्कि खोट कीचड़ उछालने वालों की नीयत में है। यही कारण है कि आज फिर बुंदेलखंड अपनी रोजी-रोटी, सच्चाई, न्याय और वजूद बचाने के लिए प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के सूत्रपात का साक्षी बुंदेलखंड आज फिर महासमर की राह पर निकल पड़ा है।
किसी ने सच ही लिखा है, “बड़े लड़इया महुबे वाले, इनकी मार सही न जाए! भीख नहीं ये न्याय मांगते, वरना सच भी बौरा जाए!!”
बुलंद बुंदेलखंड सीरीज पार्ट- 3…..जारी
विशेष अपील: (हमने “बुलंद बुंदेलखंड” शीर्षक से इस कॉलम की शुरूआत की है जिसमें देश के गाँव, देहात और शहरों में रह रहे लोगों के जीवन से जुड़े मुद्दे व समस्याएं शामिल किये जाएंगे। इस पर आपके सुझाव, विचार और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित हैं। जरूरी नहीं इस कॉलम में व्यक्त विचारों, मुद्दों से आप सहमत हों, ऐसे में लोकतंत्र और पत्रकारिता के आदर्श मूल्यों की रक्षा के लिए हम यहाँ विरोधी स्वरों को भी स्थान देंगे। आप अपने अमूल्य सुझाव, विचार, प्रतिक्रिया व आपत्तियां हमें ईमेल करें। -आईपीएस यादव, लेखक, पत्रकार एवं पीआर कंसलटेंट । प्रॉपराइटर, इंडिपेंडेंट पब्लिसिटी सर्विसेज, मुंबई । एडिटर, इंडिया आजतक न्यूज़ वेब पोर्टल । इंडिया आजतक लाइव यूट्यूब चैनल । Email: indiaajtak.com@gmail.com

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