कोशिश रहती है कि मैं पीड़ित के साथ रहूं

मेरी कोशिश रहती है कि मैं पीड़ित के साथ रहूं (बशर्ते वह मनुष्यता और प्रकृति यानि नेचर के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन न करता हो). भले वो पापी रहा हो. उपेंद्र राय के मामले में मेरी हल्की सी सक्रियता के चलते उनकी नींद उड़ी हुई है जो उन्हें इसी दफे ‘मार’ डालने पर आमादा हैं. यार, इस लोक वाले लूटतंत्र में सबको छूट है सब कुछ करने की. बहुत से लोग हमारे आप जैसे होते हैं जो संविधान, न्याय, जनता आदि शब्दों पर रहम कर देते हैं और उसी मुताबिक जीवन जीने की कोशिश करते हैं. लेकिन अगर किसी ने तेज उड़ना, तेज चलना, बड़ा बनना, सबसे बड़ा बनना ठान लिया है तो उसे काबू करना बहुत मुश्किल होता है. धीरू भाई अंबानी से लेकर सुब्रत राय तक को देखिए…

धीरू भाई को मुंबई के उद्योगपति मठाधीशों में घुसने पर बड़े बड़ों की कैसी प्रतिक्रिया रही, इसे थोड़ा बहुत जानने के लिए अभिषेक बच्चन वाली ‘गुरु’ फिल्म देख सकते हैं. सु्ब्रत राय सहारा जेल से न निकलें, इसके लिए जाने कितनी कोशिशें हुईं. चालीस साल से भी कम उम्र वाले उपेंद्र राय को इसी दफे के ‘सत्ताधारी आपरेशन’ में मार दिया जाए, इसके लिए अनंत कोशिशें / साजिशें जारी हैं.

ताजी खबर ये है कि इंडियन एक्सप्रेस जैसे बड़े मीडिया हाउस को सेलेक्टिव तरीके से ये खबर लीक कराई गई या यूं कहिए कि प्लांड एजेंडा के तहत इस अखबार को खबर परोसा गया कि उपेंद्र राय ने एक हिंदी वेब पोर्टल के मालिक यानि मैं, अपनी पत्नी डॉ रचना राय, ईडी के एक बड़े अफसर जो उस समय एक बड़े घोटाले की जांच कर रहे थे… नाम सबको पता है, राजेश्वर सिंह समेत कइयों की सीडीआर यानि काल डिटेल रिकार्ड निकलवा रखा था… बोले तो उपेंद्र राय हम सब क्या क्या बातें करते थे, इसका टेप निकलवा कर सुना करते थे…

चलो मान लिया… सुनते रहते थे… तब भी मेरी सहृदयता उनके साथ है क्योंकि वो पीड़ित हैं….. पापी भी अगर पीड़ित हो तो उसके साथ खड़ा होना चाहिए…. रही बात फोन रिकार्डिंग निकलवा कर सुनने की तो बताना चाहूंगा माननीय जांच एजेंसियों…. भाजपा के एक बड़े नेता के घर काल रिकार्ड करने की मशीन लगी है…. नंबर डालिए और रिकार्डिंग शुरू… ये मशीन अवैध है लेकिन टकनालजी बड़ी है सो लोग ले आए छुप छुपा कर देश विदेश से… बाद में यहीं बनवाने लगे….

एक दागी पत्रकार के पास भी वो काल रिकार्ड करने वाली मशीन है… मैंने देखा है उस मशीन को.. तब भी मैं ह्वाट्सअप काल नहीं करता… नेटवर्क वाली काल ही इंज्वाय करता हूं… चाहता हूं कि मेरा हर पल टेप होता रहे… किसी बहाने तो मेरी कुंडली इकट्ठी रहे…. फकीरों के टेप में कुछ गालियां कुछ प्रेम कुछ गाने कुछ थरथरराहटें कुछ दान कुछ मदद कुछ ग्रहण कुछ त्याग यही सब होगा…

पहले भी एक बार हल्ला हुआ था जब मैं जेल गया था… क्याकि यशवंत की कॉल रिकार्डिंग पकड़ी गई है…. क्या मिला.. बाबाजी का ठुल्लू…. मेरा चैलेंज है, उन सारे टेप को रिलीज कर दो… दावा है, मजेदार होगा, मजा आएगा… अरे मेरा क्या छुपा है, मेरा क्या बंटा है जो मुझे चोरी से छिप कर रिकार्ड करोगे…. कभी किसी पब्लिक मंच पर मेरा खुलेआम नार्को टेस्ट टाइप सवाल जवाब कर लेना, अगर शक भी लगे कि मैंने गलत जवाब दिया तो मैं जो कहेंगे हार जाऊंगा…. दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं जिसे छिपाया जाए….

आज उपेंद्र राय को इस कदर घेरने बदनाम करने की साजिशें हो रही हैं कि उनका अक्श उनका साया भी साथ छोड़ जाए… लेकिन मैं तो उनके साथ हूं और तब तक रहूंगा जब तक उन्हें इस तरह सताया जाता रहेगा.. बाकी उनकी करनी… वो जानें…. लेकिन जांच एजेंसियों से यह जानना चाहूंगा कि वह केस मजबूत करने की बजाय इस काम में क्यों लगी हैं कि यशवंत छोड़ दें उपेंद्र राय का साथ और उपेंद्र की पत्नी दे दें उनको तलाक…. भाई, इससे होगा यही कि केस कमजोर होता जाएगा और उपेंद्र राय छूट जाएंगे… काम पर रहिए, फैक्ट तलाशिए…. नाम और बदनाम करने का कारोबार करने के लिए बहुत सारी पीआर एजेंसियां हैं… चाहें तो उसे हायर कर लें.. जब तक नहीं हायर कर पाते हैं तब तक अगर शुद्ध रूप से अपना काम कर लेंगे तो हम सबका भला होगा… आमीन..

मूल पोस्ट…
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