“शहर मसीहा नहीं” -हिंदी फिलà¥�म कथा-पटकथा सारांश

“बिहार में टैलेंट है लेकिन साइलेंट है” को चरितारà¥�थ करता हà¥�आ यà¥�वक राजन सहाय दिन-रात मेहनत करके यह साबित करता है कि “जरूरी नहीं कि सिरà¥�फ à¤¶à¤¹à¤° में पैदा हà¥�आ वà¥�यकà¥�ति ही ऊंचाइयों को छू सकता है, बलà¥�कि à¤—ाà¤�व की धूल -मिटà¥�टी में पला बà¥�ा à¤¹à¥�आ इंसान भी à¤†à¤¸à¤®à¤¾à¤¨ की ऊंचाइयों को सà¥�परà¥�श कर à¤¸à¤•à¤¤à¤¾ है। “

कहानी बिहार के मà¥�ंगेर से शà¥�रू होती है जहां à¤°à¤¾à¤œà¤¨ सहाय अपने होमियोपैथी डॉकà¥�टर पिता à¤�वà¤� माà¤� के साथ रहकर à¤�क चिट फणà¥�ड कंपनी के लिà¤� लोगों से धन उगाही का काम करता है. अपनी छोटी सी दà¥�निया में राजन खà¥�श है जहाà¤� उसके कई दोसà¥�त हैं जिनमें से रिया भी à¤�क है जो उसकी à¤•à¤°à¥€à¤¬à¥€ है. à¤®à¤¨ ही मन à¤¦à¥‹à¤¨à¥‹à¤‚ à¤�क दूसरे को पसंद करते हैं. लेकिन पà¥�यार का फूल खिलने से पहले ही उसकी जिंदगी में à¤‰à¤ à¤¾ à¤¤à¥‚फ़ान राजन को धाराशायी कर देता है।      

राजन और उसके दोसà¥�तों दà¥�वारा जमा किया गया पैसा लेकर चिट फणà¥�ड कंपनी रातों-रात भाग जाती है और लोगों के सपने टूट जाते हैं. राजन लोगों के दà¥�ःख से टूट जाता है. इतना ही नहीं रिया के दबंग पिता के गà¥�ंडों à¤•à¥€ गà¥�ंडागरà¥�दी राजन पर कहर बनकर गिरती है. à¤�सा लगता है जैसे अब à¤°à¤¾à¤œà¤¨ सहाय का अंत à¤¹à¥‹ जायेगा à¤²à¥‡à¤•à¤¿à¤¨ माà¤� की दी हà¥�ई पà¥�रानी à¤¸à¥€à¤– राजन को याद आती है जो उसके पà¥�रà¥�षारà¥�थ को जगा देती है.

अगली सà¥�बह राजन सहाय अपना गाà¤�व छोड़कर देश की राजधानी दिलà¥�ली जाने के लिà¤� निकल पड़ता है. अपना गाà¤�व, अपनी मिटà¥�टी, खेत-खलिहान, यार-दोसà¥�त से जà¥�दाई का गम राजन को बहà¥�त à¤°à¥�लाता है. बहरहाल, à¤Ÿà¥�रेन दिलà¥�ली पहà¥�à¤�चती है. रोजी-रोटी की तलाश में à¤¬à¤¿à¤¹à¤¾à¤° से आकर à¤¦à¤¿à¤²à¥�ली में रहरहे बिहारियों à¤•à¥‡ पà¥�रति दिलà¥�लीवासियों का हिकारत भरा नजरिया à¤¦à¥‡à¤– कर राजन को गà¥�सà¥�सा आता है. वह पà¥�ा-लिखा है, मेहनत करना भी आता है. लेकिन बिहार का होने के कारण वह लोगों के घटिया मजाक और तानों का शिकार बनता है तो उसका सà¥�वाभिमान जाग जाता है.

तभी à¤µà¤¹ संकलà¥�प करता है कि जिस बिहारी पर आज लोग फबà¥�तियां और तंज कस रहे हैं, à¤�क दिन लोग उसी बिहारी पर नाज करेंगे. काम-धाम के अभाव में, भूखा-पà¥�यासा राजन à¤¦à¤¿à¤²à¥�ली में दर-दर की ठोकरें खा रहा है. गà¥�रूदà¥�वारे में लंगर का à¤ªà¥�रसाद खा कर वह गà¥�जर करता है. वहीं पर à¤‰à¤¸à¤•à¥€ मà¥�लाकात पà¥�रिया नामक à¤�क à¤ªà¤‚जाबी लड़की से होती है. पà¥�रिया से मिलने के बाद उसका वकà¥�त बदल जाता है. गà¥�पà¥�ता कंपनी के मालिक से उसकी à¤®à¥�लाकात होती है. जहाà¤� उसकी à¤�क छोटी सी à¤¨à¥Œà¤•à¤°à¥€ लग जाती है और अपनी मेहनत-लगन के बल पर वह कंपनी का मैनेजर बन जाता है.

राजन सहाय के काम करने की शैली से कंपनी में à¤¸à¤­à¥€ लोग à¤–à¥�श हैं. वाहेगà¥�रू की कृपा से पà¥�रिया भी उसकी जिंदगी में आ जाती है जो आखिर तक उसका साथ देती है. पà¥�रिया का परिवार à¤�क पारमà¥�परिक à¤•à¤Ÿà¥�टर à¤ªà¤‚जाबी परिवार है जिसे पà¥�रिया का à¤�क बिहारी यà¥�वक à¤¸à¥‡ मिलना-जà¥�लना और à¤ªà¥�रेम-पà¥�रसंग बिलकà¥�ल पसंद नहीं à¤¹à¥ˆ. परिवार के लाख मना करने के बावजूद पà¥�रिया राजन को भà¥�ला नहीं पाती है. जिससे नाराज होकर उसके à¤ªà¤¿à¤¤à¤¾ और à¤­à¤¾à¤ˆ, दोनों -पà¥�रिया व à¤°à¤¾à¤œà¤¨ के खिलाफ षड़यंतà¥�र रचते हैं. लेकिन राजन की हिमà¥�मत व à¤¸à¤®à¤�दारी के चलते वे à¤•à¤¾à¤®à¤¯à¤¾à¤¬ नहीं हो पाते, राजन और पà¥�रिया दोनों à¤�क दूसरे के हो जाते हैं।

अंततः à¤�क कटà¥�टर पंजाबी परिवार बिहारी दामाद को पाकर खà¥�श होता है. और आखिरकार à¤°à¤¾à¤œà¤¨ सहाय यह साबित कर देता है कि आम हिदà¥�सà¥�तानी की तरह बिहार के लोग भी पà¥�े-लिखे, समà¤�दार, à¤…चà¥�छे और सचà¥�चे होते हैं, और लगन व मेहनत à¤•à¤°à¤¨à¥‡ में किसी से पीछे नहीं रहते à¤¹à¥ˆà¤‚. à¤�से में à¤¦à¤¿à¤²à¥�ली-मà¥�ंबई जैसे महानगरों रहरहे à¤¬à¤¿à¤¹à¤¾à¤°à¥€ भाइयों को “à¤� à¤¬à¤¿à¤¹à¤¾à¤°à¥€” कहकर उनपर चिलà¥�लाना, à¤«à¤¬à¥�ती कसना, उनà¥�हें गाली देना और à¤‰à¤¨à¥�हें à¤—िरी à¤¹à¥�ई नजर से देखना कैसे जायज ठहराया जा सकता है? आखिरकार फिलà¥�म और हीरो राजन कà¥�मार à¤•à¤¾ यही सनà¥�देश है कि कृपया à¤¬à¤¿à¤¹à¤¾à¤°à¥€ शबà¥�द का पà¥�रयोग इजà¥�जत से करें वरना यह देश आपको कभी माफ़ नहीं करेगा. जय हिनà¥�द!           
फिलà¥�म – शहर मसीहा नहीं,
पटकथा लेखक – राजन à¤•à¥�मार,
मेंबर, राइटरà¥�स à¤�सोसिà¤�शन, 
मेमà¥�बरशिप संखà¥�या: A-27012 
                         

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His interest in knowing people, places inspired him to join media and journalism as well as his thrust to knowing the unknown took him to experience the mystic world of Osho which was culminated into initiation by Oshodhara Sadguru Trivir in 2006 when he was renamed as Swami Satchidanand. IPS Yadav has been active journalist, writer, editor, content developer, designer, PR Consultant for more than two decades. He has authored thousands of news articles, stories of common people and celebrity interviews to his credit, published in several leading dailies, web portals and You Tube channels.
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