अमित शाह और उनके पवित्र गठबंधन

अमित शाह और उनके पवित्र गठबंधन

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कर्नाटक में अपनी सरकार गिर जाने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें उन्होंने अपनी सरकार न बचा पाने की भड़ास और खीज़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को कोष कर निकाली. अमित शाह ने कहा कि यह एक अपवित्र गठबंधन है. जो जनादेश के खिलाफ जाकर कांग्रेस -जेडीएस के बीच हुआ है. अमित शाह का तर्क था कि जनादेश उनकी पार्टी के लिए था जो पिछले चुनाव की 40 सीटों के मुकाबले इस बार 104 सीटें जीती.

पूर्ण बहुमत न होने पर भी सरकार बनाने के दावे पर अमित शाह ने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे बड़े दल होने के नाते बीजेपी को ही सबसे पहले सरकार बनाने का अधिकार है. इसी वजह से हमने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है, अगर ऐसा न करते तो दोबारा चुनाव कराने की नौबत आती.

विपक्ष के जश्न पर अमित शाह ने कहा कि कर्नाटक की जनता जश्न नहीं बना रही है बल्कि कांग्रेस-जेडीएस जश्न बना रहे हैं. अमित शाह ने कहा कि यह एक अपवित्र गठबंधन है. जनादेश के खिलाफ जाकर कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन दिया है और लिया है.

जेडीएस-कांग्रेस गंठबंधन के बहाने विपक्षी एकता पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि यह लोग अपने-अपने राज्यों में 2014 का चुनाव भी बीजेपी के खिलाफ ही लड़े थे फिर भी नतीजे हमारे पक्ष में आए. आगे 2019 के चुनाव में भी नतीजे हमारे पक्ष में ही आएंगे.

उन्होंने तर्क दिया कि अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में सपा के लिए क्या कर लेंगे और राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के लिए क्या कर सकते हैं.

मैं उस प्रेस कांफ्रेंस में नहीं था, वरना जरूर उनसे कुछ प्रश्न पूछता. अगर जेडीएस-कांग्रेस गंठबंधन अपवित्र है तो राजनीति में पवित्र गठबंधन कौन सा होता है, यह तो अमित शाह ने नहीं बताया. खैर, आइए हम ही आपको बता देते हैं भाजपा और उसके पवित्र गठबंधन कौन-कौन से हैं-

भारत में पहली गठबंधन सरकार जनसंघ और मुस्लिम लीग की बंगाल में बनी थी जिसमें मुख्यमंत्री मुस्लिम लीग के थे और वित्त मंत्री परम आदरणीय श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे, क्या मुस्लिम लीग और जनसंघ की विचारधारा समान थी?

अकाली दल ने संविधान की कॉपी जलायी थी और आप स्वयं को राष्ट्रवादी बोलते हो, क्या संविधान की अवमानना करने वालों के साथ आपका गठबंधन जायज है?

1975 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध पूरा विपक्ष एकजुट हो गया था, 1977 में जो सरकार बनी उसमें लेफ़्ट, मुस्लिम लीग और जनसंघ शामिल था। क्या तब आपकी विचारधारा लेफ़्ट और मुस्लिम लीग से मेल खाती थी?

1989 में जब आपने लेफ़्ट के साथ वी॰पी॰ सिंह सरकार को समर्थन दिया था क्या तब आपकी विचारधारा उन सब दलो से मेल खाती थी जो वी॰पी॰ सिंह सरकार में थे?

1993 और 1996 में आपने ममता, करुणानिधि, चंद्रबाबु नायडू, फ़ारूख अब्दुल्ला, नीतीश कुमार, पासवान और 31 अन्य दलो के साथ मिलकर जो अटल सरकार बनायी थी, क्या उन सबकी विचारधारा आपसे मिलती थी?

जम्मू कश्मीर में आपने पूरे चुनाव में बाप बेटा और बाप बेटी को गाली देकर प्रचार किया। बाप बेटे की नैशनल कॉन्फ़्रेन्स की चुनाव में सबसे अधिक सीट आयी, आपने बाप बेटी की PDP से पोस्ट पोल अलायंस कर लिया, वो PDP जो खुले आम पाकिस्तान समर्थक है, जिसने सदा अफ़जल गुरु को शहीद बोला है, जिसका ऑन रिकार्ड स्टेट्मेंट है कि जब कोई भारतीय सैनिक मरता है तो मेरे घर में ईद होती है, उसके साथ आपने दो ध्वज के सामने सरकार बनायी, वो आपकी विचारधारा से मेल खाती है?

बिहार में आपने पूरे प्रचार में नीतीश कुमार को और नीतीश कुमार ने आपको गालियाँ दी। आपने उनके DNA तक को गड़बड़ बोल दिया, नीतीश ने संघ मुक्त भारत की कसम खाई थी। आपने गठबंधन की सरकार गिराकर बड़े दल राजद को सरकार नहीं बनाने दी और स्वयं नीतीश के साथ सरकार बना ली, क्या वो आपकी विचारधारा से मेल खाता है, तब आपकी नैतिकता कहाँ गई थी?

गोवा में कांग्रेस पार्टी सबसे अधिक सीट जीतकर आयी, आपने एक ऐसे दल के साथ चुनाव के बाद गठबंधन किया जो बना ही आपके विरुद्ध था। आपने राज्यपाल को कांग्रेस को न्योता नहीं देने दिया और कांग्रेस के विधायक से इस्तीफ़ा दिलाकर सरकार बना ली। क्या वो गठबंधन समान विचारधारा का था?

आपने मणिपुर में कांग्रेस को सरकार नहीं बनाने दी, कांग्रेस केवल तीन सीट दूर थी बहुमत से और आप दस सीट दूर थे, आपने तिकड़मों से वहाँ सरकार बना ली, क्या यह आपकी विचारधारा के अनुकूल है, तब आपकी नैतिकता कहाँ गई थी?

मेघालय में आपकी केवल दो सीट थी, कांग्रेस वहाँ सबसे बड़ी पार्टी थी, राज्यपाल ने फिर भी आपकी सरकार बनवा दी। यह भी आपकी विचारधारा के अनुकूल है। अमित शाह, आपकी क्या विचारधारा है आपको नहीं पता है. अगर आपको न पता हो क्या वह भी मैं आपको बताऊँ?

तो सुनिए, राजनीति की सबसे बड़ी विचारधारा होती है -अवसरवाद जिसे आपकी भाजपा और कांग्रेस ने ही नहीं सभी दलों ने खूब जिया और जमकर पिया है. आप सब लोग इस हमाम में नंगे हैं, फिर क्यों नौ-नौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली. जहाँ आपको मौका मिला आपने चौका मार दिया और इस बार कोंग्रेस को मौका मिल गया तो उसने चौका मार दिया.

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